अलगावादी नेताओ सताने लगा गिरफ्तारी का डर तो अब निकल पढ़े दिल्ली नामी वकील तलाशनें

नई दिल्ली । टेरर फंडिग के मामले में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए गए शब्बीर शाह सहित लगभग आधा दर्जन अलगाववादी नेताओं की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। इसमें सैयद अली शाह गिलानी का दामाद अल्ताफ अहमद शाह भी शामिल है।

अपनी मुश्किलें बढ़ता देख और इस कार्रवाई को कश्मीर के लोगों के बीच भावनात्मक मुद्दा बनाने में नाकाम रहे अलगाववादी नेता अब अपने बचाव के लिए ऐसे मजबूत और नामी वकीलों की तलाश कर हैं जो अदालत में मजबूती के साथ उनकी पैरवी कर सकें।

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अंग्रेजी अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुताबिक, हुर्रियत नेताओं ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एसएआर गिलानी को अपने लिए वकील तलाशने की जिम्मेदारी सौंपी है जो एनआईए की विशेष अदालत में उनकी बात रख सकें। गिलानी वही शख्स हैं जो 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले में बरी किए गए थे और फिलहाल वे एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाते हैं जो ‘राजनीतिक बंदियों’ को जेल से छुड़ाने के लिए काम करता है।

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अपना पक्ष रखने के लिए दिल्ली के एक शीर्ष वकील से भी इस सिलसिले में संपर्क भी किया गया है। यह वकील सुप्रीम कोर्ट, बॉम्बे हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर चुके हैं। वह कश्मीर के मुद्दों पर भी लिखते रहे हैं। दूसरी तरफ एनआईए ने अपना पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकील सिद्धार्थ लूथरा को रखा है जो सात हुर्रियत नेताओं की कस्टडी को बढ़ाने को लेकर अपनी दलीलें रखेंगे।

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खुफिया विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘जम्मू में हुर्रियत के कानूनी सेल के सदस्य देविंदर सिंह बहल के घर इस सप्ताह छापा मारा गया था जिसके बाद एनआईए उनसे पूछताछ कर रही है। इसके अलावा, श्रीनगर में ऐसे वकील नहीं है जो उन्हे अच्छी कानूनी सुविधा मुहैया करा सके, यही वजह है कि हुर्रियत नेता दिल्ली में कानूनी मदद तलाश रहे हैं।’

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खबरों की माने तो सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूख सहित हुर्रियत का शीर्ष नेतृत्व इस बात से ज्यादा परेशान है कि उनकी संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक हो रही है और इससे कश्मीरी आवाम के बीच यह संदेश जा रहा है जनता तो सड़क पर प्रदर्शन करती रही जबकि उनको अपना हमदर्द बनाने वाले ये नेता संपत्ति बनाने में जुटे रहे। खुफिया विभाग के जुड़े एक सूत्र ने टीओआई से कहा, ‘प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जब से शब्बीर शाह को गिरफ्तार किया है तब से हुर्रियत के शीर्ष नेताओं को यह डर सता रहा है कि जल्द ही एनआईए की जांच उन तक भी पहुंच सकती है।’

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खबरों की माने तों एनआईए जल्द ही मीरवाइज, गिलानी और यासीन मलिक को जांच के बुला सकती है। एनआईए पहले ही पुछताछ के लिए गिलानी के बेटे नसीम गिलानी को समन कर चुकी है। जिसके जवाब में नसीम गिलानी ने एनआईए से मांग करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार उसे श्रीनगर से दिल्ली और दिल्ली से वापस श्रीनगर जाने का खर्च दे। हालांकि गिलानी का परिवार एनआईए के आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है।

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